सामने आ के निगाहों को चुराता क्यों है …..
है अगर प्यार उसे भी तो छुपाता क्यों है …….
चैन दिन मैं है उसे और ना रातों को सुकून …..
इतनी कुर्बत है तो फिर रूठ के जाता क्यों है …
यूं तो मैं भूल गया हूँ उसे माजी की तरह ……. .
दिल को हर वक़्त मगर याद वो आता क्यूं है …….
तेरी फरियाद सुनी है ना सुनेगा कोई ……
फिर भी तू हाथ दुआओं को उठाता क्यूं है …
