ले गया छीन के कौन आज तेरा सबर-ओ-करार
बेक़रारी तुझे , ऐ दिल , कभी ऐसी तोह ना थी
चश्म-ऐ-कातिल मेरी दुश्मन थी हमेशा लेकिन
जैसे अब हो गयी कातिल कभी ऐसी तो ना थी